https://youtu.be/3KuSPeTlmA8 रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई अहबाब ने ये कह के संवारीContinue reading “नौहा : कैफ़ी आज़मी : रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई : : મરણ ના કાવ્યો : :”